मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से गर्दन और कमर दर्द क्यों होता है?

ऑफिस में काम करते हुए कंधे के दर्द से परेशान महिला।
आजकल मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल हर उम्र के लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई हो या सोशल मीडिया, घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठना आम बात है। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे गर्दन और कमर दर्द की बड़ी वजह बन रही है।
ज्यादातर लोग काम करते समय अपनी बॉडी पोस्टर (Body Posture) पर ध्यान नहीं देते। लगातार झुककर बैठना, गर्दन को आगे की ओर रखना और बिना ब्रेक लिए लंबे समय तक काम करना मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है। यही दबाव समय के साथ दर्द और जकड़न में बदल जाता है।
इस लेख में समझते हैं कि आखिर मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल गर्दन और कमर दर्द का कारण क्यों बनता है, और इससे कैसे बचा जा सकता है।
गलत पोश्चर (Posture) सबसे बड़ी वजह
जब व्यक्ति मोबाइल देखते समय गर्दन को नीचे झुकाता है, तो गर्दन पर सामान्य से कई गुना ज्यादा दबाव पड़ता है। इसे अक्सर “टेक्स्ट नेक सिंड्रोम” भी कहा जाता है। इसी तरह लैपटॉप पर झुककर काम करने से रीढ़ की प्राकृतिक वक्रता (Natural Curve) बिगड़ जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो मांसपेशियों में खिंचाव और डिस्क पर दबाव बढ़ जाता है।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना
लगातार 2–3 घंटे तक बिना उठे बैठना शरीर के लिए नुकसानदायक है। जब शरीर एक ही स्थिति में रहता है, तो:
- मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं
- रक्त संचार कम हो जाता है
- कमर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता है
धीरे-धीरे यह स्थिति क्रॉनिक बैक पेन का रूप ले सकती है।
कमजोर कोर मसल्स (Core Muscles)
कोर मसल्स यानी पेट और कमर के आसपास की मांसपेशियां रीढ़ को सहारा देती हैं। अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं है और केवल बैठकर काम करता है, तो ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। कमजोर कोर मसल्स होने पर कमर को पूरा सहारा नहीं मिल पाता, जिससे दर्द की समस्या बढ़ जाती है।
गलत बैठने की व्यवस्था (Improper Workstation Setup)
बहुत से लोग बिस्तर पर बैठकर या बिना बैक सपोर्ट वाली कुर्सी पर काम करते हैं।
- स्क्रीन आंखों के स्तर पर नहीं होती
- कुर्सी की ऊंचाई सही नहीं होती
- कमर को सपोर्ट नहीं मिलता
इससे गर्दन आगे की ओर झुकती है और कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
मोबाइल का अत्यधिक उपयोग
मोबाइल को लगातार नीचे देखकर इस्तेमाल करने से गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव बना रहता है।
दिन में कई घंटों तक यह दोहराव होने से:
- गर्दन में जकड़न
- कंधों में दर्द
- सिरदर्द
- ऊपरी पीठ में दर्द
जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
बच्चों और किशोरों में बढ़ता गर्दन और कमर दर्द
ऑनलाइन क्लास, गेमिंग और सोशल मीडिया के कारण कम उम्र में भी स्पाइन से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
इसमें शामिल किया जा सकता है:
- गलत बैठने की आदत
- पढ़ाई के दौरान झुककर बैठना
- स्क्रीन टाइम का बढ़ना
वर्क फ्रॉम होम का असर

लैपटॉप पर काम करते समय गर्दन दर्द से परेशान महिला।
वर्क फ्रॉम होम के दौरान अधिकतर लोग सही वर्कस्टेशन का उपयोग नहीं करते। वे अक्सर सोफे या बिस्तर पर बैठकर काम करते हैं, लैपटॉप गोद में रखते हैं और घंटों तक बिना ब्रेक लिए स्क्रीन देखते रहते हैं।
इससे गर्दन आगे झुक जाती है और कमर के निचले हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसी आदतें मांसपेशियों में खिंचाव और क्रॉनिक गर्दन व कमर दर्द का कारण बन सकती हैं।
क्या ज्यादा स्क्रीन टाइम से स्लिप डिस्क का खतरा बढ़ता है?
सिर्फ स्क्रीन टाइम स्लिप डिस्क का सीधा कारण नहीं है, लेकिन लगातार गलत पोश्चर और रीढ़ पर दबाव जोखिम बढ़ा सकता है।
यदि व्यक्ति लंबे समय तक झुककर बैठता है और मांसपेशियां कमजोर हैं, तो डिस्क पर दबाव बढ़ सकता है। पैरों में दर्द, सुन्नपन या झनझनाहट जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
आम लक्षण
मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा उपयोग से होने वाले गर्दन और कमर दर्द के कुछ सामान्य लक्षण:
- गर्दन घुमाने में दर्द
- कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द
- लंबे समय तक बैठने पर जकड़न
- कंधों में भारीपन
- कभी-कभी हाथों में झनझनाहट
यदि ये लक्षण 1–2 हफ्तों से ज्यादा बने रहें, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी हो जाता है।
बचाव के उपाय
गर्दन और कमर दर्द से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- हर 30–40 मिनट में 2–3 मिनट का ब्रेक लें
- स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें
- कमर को सपोर्ट देने वाली कुर्सी का इस्तेमाल करें
- मोबाइल को आंखों के बराबर उठाकर देखें
- रोजाना हल्की स्ट्रेचिंग और व्यायाम करें
- नियमित रूप से फिजियोथेरेपी एक्सरसाइज अपनाएं
गर्दन और कमर दर्द के लिए एर्गोनॉमिक्स क्यों जरूरी है?
सही एर्गोनॉमिक सेटअप दर्द से बचाव में मदद करता है।
- कुर्सी ऐसी हो जिसमें कमर को सपोर्ट मिले और पैर जमीन पर टिके हों।
- स्क्रीन आंखों के स्तर पर हो।
- कीबोर्ड और माउस ऐसी ऊंचाई पर हों कि कंधे और कलाई रिलैक्स रहें।
- हर 30–40 मिनट में छोटा ब्रेक लेना जरूरी है।
सही बैठने की आदत और नियमित मूवमेंट से गर्दन और कमर दर्द का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
क्या दर्द नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है?
हल्का गर्दन या कमर दर्द कभी-कभी सामान्य हो सकता है और आराम से ठीक हो जाता है। लेकिन यदि दर्द 1–2 हफ्तों से ज्यादा रहे, बढ़ता जाए या रोजमर्रा के कामों में दिक्कत पैदा करे, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
- हाथ या पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट
- कमजोरी महसूस होना
- दर्द का पैरों तक फैलना
- चलने में परेशानी
ऐसे लक्षण नसों या रीढ़ से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से मिलें?
अगर दर्द लगातार बना रहे, दर्द पैरों तक फैलने लगे, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत किसी अनुभवी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
नोएडा में विशेषज्ञ उपचार और सही मार्गदर्शन के लिए डॉ. मयंक चौहान से परामर्श लिया जा सकता है। सही जांच के बाद व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार उपचार योजना बनाई जाती है, जिससे दर्द से स्थायी राहत मिल सके।
फिजियोथेरेपी की भूमिका

क्लिनिक में फिजियोथेरेपिस्ट मरीज के कंधे की थेरेपी करते हुए।
फिजियोथेरेपी गर्दन और कमर दर्द के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- मांसपेशियों को मजबूत बनाती है
- पोश्चर सुधारती है
- रीढ़ की लचक बढ़ाती है
- भविष्य में दर्द की संभावना कम करती है
सही समय पर शुरू की गई फिजियोथेरेपी कई मामलों में दवाइयों या सर्जरी की आवश्यकता को भी कम कर सकती है।
अंतिम विचार
मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग आज की जरूरत है, लेकिन गलत तरीके से और लंबे समय तक इस्तेमाल करने से गर्दन और कमर दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। सही पोश्चर, नियमित ब्रेक, व्यायाम और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है। दर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं है। समय पर ध्यान देने से न केवल दर्द कम होता है, बल्कि भविष्य की गंभीर समस्याओं से भी बचाव संभव है।
यदि गर्दन या कमर दर्द लगातार बना हुआ है, तो नोएडा में अनुभवी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मयंक चौहान से परामर्श लें। सही जांच, सटीक डायग्नोसिस और व्यक्तिगत उपचार योजना के साथ वे आपको दर्द से राहत दिलाने और स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाने में मदद कर सकते हैं।






